शैक्षिक कार्यक्रम

संकाय – अभियांत्रिकी

इस अभियांत्रिकी संकाय में निहित होते हैं – अंतरिक्ष अभियांत्रिकी, सिविल अभियांत्रिकी, रासायनिक अभियांत्रिकी, यांत्रिकीय अभियांत्रिकी, पदार्थ अभियांत्रिकी, प्रबंध अध्ययन, वातावरणीय तथा सागरीय विज्ञान केन्द्र, विद्युतीय, विद्युतीय संपर्क, संगणना विज्ञान तथा स्वचालितयंत्र (ऑटोमेशन), विद्युन्मानीय अभिकल्प प्रौद्योगिकी केन्द्र, उत्पाद अभिकल्प तथा विनिर्माणन केन्द्र, तथा संगणक शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र ।

शैक्षणिक पाठ्यक्रम द्वारा एम.ई. या एम.टेक तथा अनुसंधान द्वारा पीएच.डी एवं एम.एससी (अभि.) प्रदान करनेवाले शैक्षिक कार्यक्रम प्रायः सभी विभागों में उपलब्ध हैं । इस संस्थान के एम.ई. / एम.टेक कार्यक्रमों का एक अनुपम विशेषता यहाँ की आकलन प्रणाली है जो छात्रों को अपनी अभिरुचि / रुचि के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों का अनुसरण करने देती है । प्रत्येक एम.ई. / एम. टेक. कार्यक्रम में एक प्रधान मूल पाठ्यक्रम विनिर्दिष्ट होता है जिसे छात्र अपने ही मूल विभाग या अन्य विभाग में उपलब्ध अनेकों पाठ्यक्रमों से ले सकता है तथा अपनी पसंद के विषय पर शोध-प्रबंध तैयार कर सकता है । ये पाठ्यक्रम ज्ञिज्ञासु छात्रों को आकर्षित करते हैं । भा वि सं अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं / उद्योगों के अनेकों प्रायोजित अभ्यर्थियों को एवं गुणवत्ता सुधार (क्यूआईपी) कार्यक्रम के अधीन शैक्षणिक संस्थाओं के अभ्यर्थियों को भी आकर्षित करता है । एम.ई. / एम. टेक कार्यक्रम को हाल ही में कुछ विभागों में लचीला किया गया है जो उद्योगों के अभ्यर्थियों को संस्थान के एम.ई. / एम. टेक पाठ्यक्रम लेने के लिये उपयुक्त बना देता है । इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित कार्यक्रमों से अधिक लंबी अवधि तक चलते है ताकि अभ्यर्थी अपने-अपने प्रयोगशालाओं / उद्योगों में कार्य करते हुए भी एम.ई. / एम. टेक कार्यक्रमों को पूरा कर सकें ।

एम. एससी (अभि.) / पीएच. डी. उपाधियों को अग्रसर करनेवाले अनुसंधान कार्यक्रम अनेकों विभागों के प्रमुख आकर्षण रहे हैं । इस कार्यक्रम में सीमित पाठ्यक्रम उद्देश्य छात्रों को अनुसंधान कार्य करने हेतु तैयार करना होता है परंतु, प्रमुख महत्व शोध प्रबंध को दिया जाता है । उत्कृष्ट प्रयोगशालाएँ तथा संगणनात्मक सुविधाएँ, एक अव्दितिय ग्रंथालय, मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान दोनों में सशक्त रुचियोंवाले उत्कृष्ट / प्रतिभासंपन्न शोध निर्देशक प्राध्यापक ये सब मिलकर छात्रों के लिये एक ऐसा वातावरण तैयार करते हैं जिससे अनुसंधान के लिये छात्रों में प्रबल अभिरुचि उत्पन्न हो जाती है । ये कार्यक्रम देश के हरेक कोने से छात्रों तथा कुछ अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भी आकर्षित करते हैं ।

एम.एससी (अभि.) / पीएच. डी. को अग्रसर करनेवाले बाह्य पंजीकरण कार्यक्रम के द्वारा उद्योगों / अनुसंधान एवं विकास के अभ्यर्थी, संस्थान के शोध निर्देशक प्राध्यापक के साथ-साथ अपने मूल संगठन के वरिष्ठ अधिकारी के संयुक्त मार्गदर्शन में कार्य कर सकते हैं तथा न्यूनतम प्रयास के साथ संस्थान की प्रतिष्ठित अनुसंधान उपाधि प्राप्त कर सकते हैं । यह एक अत्यंत सफल कार्यक्रम है जिसमें 30% अनुसंधान के छात्र, अभियोंत्रिकी संकाय में नामांकित हैं ।

शोध निर्देशक प्राध्यापक गण – राष्ट्रीय महत्व के विशेष क्षेत्रों में योग्यता प्राप्त एवं स्वतंत्र होने के कारण, भारी मात्रा में प्रायोजित शोधकार्य में संलग्न होते हैं तथा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न वैज्ञानिक गोष्ठियों में अपना बौद्धिक योगदान करते हैं । इस प्रकार की गतिविधियों विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में परिवर्तनशील परिस्थितियों में भी त्वरित गति से उन्हें सक्षम बना देता है तथा नये विषयों के परिचय एवं संपोषण द्वारा नए अनुसंधान की नींव डालने में सहायक होता है । इस प्रकार अनुसंधान संबंधित प्रत्येक प्रयत्न, नयी दिशा में एक नया चरण बन जाता है जो अभियांत्रिकी एवं विज्ञान के सदा परिवर्तनशील दृश्य में सीखने / आविष्कार करने के अनुभव को प्रफुल्लित कर देता है ।

1997 – 98 के सत्र में, संस्थान ने तीन नये पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया है अर्थात (1) सूक्ष्मविद्युन्मानिकी (माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स) में एम. ई. कार्यक्रम, (2) संकेत प्रक्रियन (सिग्नल प्रोसेसिंग) में एम. ई. कार्यक्रम तथा (3) उत्पाद अभिकल्प तथा अभियांत्रिकी में एम. डेस. कार्यक्रम ।

देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास के परिवर्तनशील दृश्यों के साथ बने रहने के उद्देश्य से प्रबन्ध शास्त्र में निम्न स्नातकोत्तर उपाधि (मास्टर्स डिग्रियाँ) के पाठ्यक्रम प्रारंभ कर दिये गये हैं । प्रबंध के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश में नेतृत्व के निर्माण के लिये एक स्नातकोत्तर (एम. प्रबंध) कार्यक्रम तथा प्रौद्योगिकी प्रबंध तथा व्यवसाय विश्लेषिकी इसके अतिरिक्त उच्च संगणना (सुपर कम्प्यूटर) शिक्षा तथा अनुसंधान केन्द्र में एम. टेक. संगणनात्मक विज्ञान कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है ।

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