छात्र कोना

वर्तमान छात्र – शैक्षिक सत्यनिष्ठता

वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों से नैतिक व्यपगतों के मामले प्रकट हो रहे हैं – बढ़ रहे हैं – इसके बारे में समाचारों में रिपोर्टित है । इस संदर्भ में हमें जागरूकता का निर्माण करना है तथा शैक्षिक निष्ठा बनाए रखने के लिये स्पष्ट मार्गदर्शनों के एक सेट के साथ तैयार रहना है । सन्नद्धशील शैक्षिक पर्यावरण ही ऐसा करने हेतु वैयक्तिक तथा सामुदायिक उत्तरदायित्व अपरिहार्य होता है ।

अनुचित शैक्षिक व्यवहार के ऐसे तीन व्यापक श्रेणियाँ हैं – जिनके बारे में विचार करना आवश्यक है : I) साहित्यिक चोरी II) धोखा तथा III) स्वार्थों का संघर्ष

I) साहित्यिक चोरी – मूल स्रोत के (कुछ मामलों में) प्रति उचित (आभारोक्ति) स्वीकृति या अनुमति के बिना सामग्री, विचारों, अंकों, कोडों या डाटाओं का उपयोग करना ही साहित्यिक चोरी होती है । इसमें, ऐसी सामग्री (विषय-वस्तु) का प्रस्तुतीकरण, शब्दशः या भावानुवाद के रूप में निहित होता है जो अन्य व्यक्ति द्वारा रचित होता हो या स्वयं से पूर्व में ही प्रकाशित किया गया हो। साहित्यिक चोरी में सम्मिलित होते हैं –

i. किसी रिपोर्ट पुस्तक, शोध-प्रबंध, प्रकाशन या अंतर्जाल से पाठ्यवस्तु / वाक्यों को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से पुनर प्रस्तुतीकरण ।

ii. स्वयं अपने ही पूर्व प्रकाशित डाटा, उदाहरण – अंक, चित्र या किसी भी अन्य व्यक्ति के डाटा आदि का पुनर-प्रस्तुतीकरण ।

iii. मूल स्रोत का उल्लेख ये बिना ही क्लास नोट से विषय-वस्तु को लेना, या अंतर्जाल स्थलों से सामग्री को उतार लेना (डाउनलोड कर लेना) तथा उन्हें अपने कक्षा की रिपोर्टों में, प्रस्तुतीकरणों में हस्तप्रतियों में या शोध प्रबंधों में संस्थापित कर लेना ।

iv. स्व साहित्यिक चोरी में निहित होता है – उचित उल्लेख दिये बिना ही स्वयं अपने ही पूर्व प्रकाशित जर्नलों की कृतियों या सम्मेलनों की कार्यवाहियों के विषयों से शब्दशः नकल करना ।

इस प्रलेख के अंत में दिये गये स्रोत यह स्पष्य करते हैं कि उचित संदर्भ का संचालन कैसे करें साहित्यिक चोरी के अधिक उदाहरण तथा उनसे कैसे बचना चाहिए इन में दिये गये हैं ।

II) धोखा – यह धोखा अस्वीकार्य शैक्षिक व्यवहार का एक और रूप है तथा उसे विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है :

i. परीक्षाओं में नकल करना, तथा गृह-पाठ कार्यों का नकल करना, आवधिक लेखों, या स्तप्रतियों
  का नकल करना । नकल करने देना या अनुकूल करना (सुविधा देना), या किसी अन्य व्यक्ति
  के लिये रिपोर्ट लिखना या परीक्षा लिखना ।

ii. जब प्राधिकृत नहीं होना जब भी अप्राधिकृत सामग्री का उपयोग करना, नकल करना, सहयोग
  करना तथा विभिन्न स्रोतों से लेखों या विषय-वस्तुओं को खरीदना या उधार लेना ।

iii. तथ्यात्मक आँकड़ों का जालसाज़ी करना या मिथ्याकरण (चालबाज़ी करना) तथा उन्हें शोध-
  प्रबंधों में तथा प्रकाशनों में उपयोग करना । उपेक्षा साथ ही जानबूझकर की जानेवाली बेईमानी
  के विरुद्ध सुरक्षा प्राप्त करने के लिये शैक्षिक आचरण के लिये कुछ मार्गदर्शन नीचे उपलब्ध
  कराये गये हैं :

उपेक्षा साथ ही जानबूझकर की जानेवाली बेईमानी के विरुद्ध सुरक्षा प्राप्त करने के लिये शैक्षिक आचरण के लिये कुछ मार्गदर्शन नीचे उपलब्ध कराये गये हैं :

i. प्रयोगों तथा संगणनात्मक कार्य के लिये उचित प्रणाली विज्ञान का उपयोग करें ।

ii. मूल चित्रों सहायक डाटा को निष्कासन, प्रयोगालयी नोट बुकों तथा संगणक फ़ोल्डरों जैसे
  प्राथमिक तथा द्वितीय स्तर के डाटा को सावधानपूर्वक रिकार्ड कर लें तथा बचाव कर लें ।
  प्रतिमाओं / छायाचित्रों के न्यूनतम अंकात्मक परिचालन होना चाहिए (चालबाज़ी होने चाहिए),
  अगर आवश्यक हो, तो मूल पाठ के बाद ही संवीक्षा के लिये बचकर रख लें, तथा किये गये
  परिवर्तनों के स्पष्ट रूप से चित्रित कर दें ।

iii. प्रयोगों तथा अनुरूपणों के संतुलीत पुनर उत्पादकता तथा सांख्यिकीय विश्लेषण को सुनिश्चित
   कर लें । यह तो महत्वपूर्ण है कि डाटा के प्रति ईमानदार रहना तथा प्रभावात्मक चित्र बनाने
   के लिये कुध डाटा बिंदुओं को न छोड़ें (भूलें) (जिसे सामान्यतः चेटीपिकिंग – उठपठांग कहा
   जाता है) ।

iv. प्रकाशन या एकास्वाधिकार के दौरान जाँच करने हेतु समर्थ बनाने के लिये प्रयोगालय के
   नोट-बुकों को मुद्रित पृष्ठ संख्या के साथ जिल्द प्रयुक्त नोट-बुकों में सुरक्षित रखना चाहिए ।
   प्रत्येक पृष्ठ पर दिनांक का उल्लेख होना चाहिए ।

v. अपने ही स्पष्ट शब्दों में लिख दें । यह तो आवश्यक है कि अंतर्जाल से या अन्य स्रोतों से
  अपने कक्षा-कार्यों के लिये, हस्तप्रतियाँ तथा शोध प्रबंधों के लिये नकल करें तथा छिपका दें,
  के लोभ को रोक लें ।

vi.उचित उद्धरणों के साथ पिछली रिपोर्टों, पद्धतियों, संगणक कार्यक्रमों आदि को उचित श्रेय दें ।
  अपने ही प्रकाशित कृतियों में से ली गई सामग्री का भी उल्लेख किया जाए, अन्यथा जैसे
  ऊपर उल्लेख किया गया है, उसे स्व-साहित्यिक चोरी माना जाएगा ।  

III) स्वार्थों का संघर्ष :

व्यावसायिक कार्यकलापों के साथ वैयक्तिक या निजी हितों / स्वार्थों का संघर्ष, शिक्षण अनुसंधान, प्रकाशन, समितियों पर कार्य, अनुसंधान निधियन तथा परामर्श जैसे विविध कार्यकलापों में संभवनीय संघर्ष को अग्रसर करेगा । वास्तविक व्यावसायिक स्वतंत्रता, उद्देश्यता, तथा वचनबद्धता का संरक्षण करना आवश्यक है तथा हितों / स्वार्थों के साथ के संघर्षों से उभरने वाली किसी भी अनुचितता की अस्तित्व से बचना चाहिए । यह हितों का संघर्ष केवल वैयक्तिक वित्तीय लाभ तक ही सीमित नहीं है, अभिजात पुनरीक्षण विभिन्न समितियों पर कार्य सहित भारी मात्रा के व्यावसायिक शैक्षिक कार्यकलापों तक यह विस्तरित होता है जो उदाहरण निधियन की जाँच या मान्यता प्रदान करना, साथ ही सार्वजनक नीति को प्रभावित कर सकता है । पारदर्शकता के संघर्षों को समुचित प्राधिकारियों के सम्मुख लिखित में प्रकट कर देना चाहिए। स्रोतों के साथ व्यवहार करते समय निम्न भाग में कुछ अतिरिक्त सूचना भी उपलब्ध है ।

वैयक्तिक एवं सामूहिक उत्तरदायित्व :

छात्र के पात्र  : विभाग को अपने शोध प्रबंध (M.E., M.Sc., या Ph.D.) प्रस्तुत करने के पहले छात्र का यह उत्तरदायित्व होता है कि वेब (नीचे स्रोत देखें) पर उपलब्ध सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके अपने शोध प्रबंध की यह जाँच कर लें कि उसमें साहित्यिक चोरी तो नहीं हुई है । इसके अतिरिक्त छात्र को यह प्रमाणित करना होता है कि उन्हें संस्थान के शैक्षिक मार्गदर्शन के बारे में पता है तथा उन्होंने अपने प्रलेख की जाँच साहित्यिक चोरि के संदर्भ कर ली गई तथा शोध-प्रबंध वास्तविक / मूल है । वेब जाँच से साहित्यिक चोर इनकार नहीं किया जा सकता ।

संकाय के पात्र : संकाय यह सुनिस्चित कर दें कि प्रयोगों, संगणनाओं, तथा सैद्धांतिक विकासों के लिये उचित पद्धतियों का अनुसरण किया गया है । तथा डाटाओं को अभिलेखाकरण को उचित रूप से रिकार्ड कर लिया गया है तथा भविष्य के संदर्भ में बनाया रखा गया है । उसके अतिरिक्त उन्हें चाहिए कि अपना हस्तप्रतियों तथा शोध प्रबंधों का ध्यानपूर्वक संवीक्षा कर लें । इनके लिये साहित्यिक चोरी के वेब द्वारा जाँच के संबंध में छात्र के प्रमाणन के अलावा, संस्थान भी इस साहित्यिक चोरी के संबंध में SERC पर कुछ वाणिज्यिक स़फ़्टवेयर उपलब्ध करायेगा । रिपोर्टों, शोध-प्रबंधों तथा हस्त-प्रतियों की जाँच के लिये इस सुविधा का उपयोग करने के लिये संकाय सदस्यों को प्रस्तावित किया जाता है ।

शैक्षिक सत्यनिष्ठा से संबंधित उपरोक्त विस्तृत प्रश्नों के वैयक्तिक अनुपालन को सुनिश्चित करने की उत्तरदायित्व संकाय सदस्य का होता है ।

संस्थागत पात्र :  वैयक्तिक तथा संस्थागत इन दोनों के लिये दीर्घावधि के परिणाम का गंभीर अपराध तो शैक्षिक निष्ठा का अतिक्रमण होता है तथा यह विभिन्न प्रतिबंधों को अग्रसर करता है ।

छात्र के संदर्भ में, शैक्षिक अतिक्रमण का प्रथम उल्लंघन से चेतावनी और / अथवा ‘F ‘  कोर्स ग्रेड को बढ़ावा देता है । पुनरावृत्ति अपराध, अगर यह मान लिया जाता है कि वह पर्याप्त गंभीर है – वह बहिष्कार को बढ़ावा देगा । अतः सिफ़ारिश दी जाती है कि संकाय विभाग के चेयरमैन की सूचना किसी भी शैक्षिक उल्लंधन के बारे में लाएँ ।

वैयक्तिक कदाचार की रिपोर्ट की पुष्टि पर, निदेशक, उस विषय के अन्वेषण के लिये एक समिति की नियुक्ति कर दें तथा मामले दर मामले पर समुचित उपाय बताने का सुझाव दें ।

स्रोत

1. राष्ट्रीय विज्ञान विषय अकादमी – एक विज्ञानी पर
   http://www.nap.edu/openbook.php?record_id=4917=R1

2. http://www.admin.cam.ac.uk/univ/plagiarism/

3. http://www.aresearchguide.com/6plagiar.html

4. https://www.indiana.edu/~tedfrick/plagiarism

5. http://www.files.chem.vt.edu/chem-ed/ethics/index.html

6. http://www.ncusd203.org/central/html/where/plagiarism_stoppers.html

7. http://sja.ucdavis.edu/files/plagiarism.pdf

8. http://web.mit.edu/academicintegrity/

9. http://www.northwestern.edu/provost/students/integrity/

10.http://www.ais.up.ac.za/plagiarism/websources.htm#info

11.http://ori.dhhs.gov/

12.http://www.scientificvalues.org/cases.html

 

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