शैक्षिक

प्रभाग – केन्द्र (निदेशक के अधीन)

संस्थान के केन्द्रों में सम्मिलित हैं – जे आर डी टाटा स्मारक ग्रंथालय, उच्च संगणना शिक्षा तथा अनुसंधान केन्द्र, राष्ट्रीय विज्ञान सूचना केन्द्र, जैव सूचनिकी केन्द्र, निरंतरता शिक्षण केन्द्र, नानो विज्ञान एवं अभियांत्रिकी केन्द्र (CeNSE), तथा अंकात्मक सूचना सेवा केन्द्र । केन्द्र में 50 से भी अधिक छात्र हैं जो स्नातकोत्तर उपाधि तथा पीएच. डी. उपाधियों के लिये अध्ययन कार्य करते हैं तथा लगभग 35 संकाय सदस्य हैं जो अनुसंधान, प्रकाशक तथा अध्यागन कार्यकलापों में कार्यरत रहे हैं ।

जे आर डी टाटा स्मारक ग्रंथालय

जे आर डी टाटा स्मारक ग्रंथालय, जनप्रिय रूप से पहचाननेवाला भारतीय विज्ञान संस्थान के ग्रंथालय भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ग्रंथालयों में अत्युत्तम रहा है । 1911 में प्रारंभीत हैं जो संस्थान के प्रथम तीन विभागों में से एक रहा है, यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र बन गया है । यह ग्रंथालय वार्षिक रूप से संस्थान के कुल बजट के लगभग 10-12% प्राप्त करता है । ग्रंथालय – अनुदान की लगभग 95% राशि आवधिक चंदों पर व्यय की जाती है जो विश्व के इस भाग में अद्वितीय रहा है । पुस्तकों, आवधिकों (पत्र-पत्रिकाओं), तकनीकी रिपोर्टों तथा मानक ग्रंथों आदि के लगभग 5 लाख संग्रह के साथ यह जे आर डी टाटा स्मारक ग्रंथालय, जो लगभग 5000 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थित है – वह देशभर के अत्युत्तमों में से एक रहा है । सद्यतः यह 1734 से भी अधिक (आवधिकों) पत्र-पत्रिकाओं को प्राप्त करता है ।

एस ई आर सी

उच्च संगणना शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (एसईआरसी) – अनुसंधान, संगणना तथा परामर्श में उत्कृष्टता के लिये प्रयास करता है । एसईआरसी के संकाय, संगणना एवं संगणक प्रणाली के सीमांत क्षेत्रों में अनुसंधान का अनुसरण करते हैं । यह केन्द्र अनेकों राष्ट्रीय पहलुओं तथा औद्योगिक परामर्श एवं अनुसंधान का नेतृत्व करता है । इसकी प्रायोजित अनुसंधानात्मक परियोजनाएँ डीआरडीओ, डीओई, डीएसटी, आईएसआईओ, एमएचआरडी, जैसे सरकारी संगठनों के साथ तथा हिटाची, एचपी, आईबीएम, एलजी, फिलगप्स, तथा टीआई आदि के साथ विशिष्ट बाह्य अंतर्क्रियाएँ करती हैं । केन्द्र के वर्तमान सूचियों में सम्मिलित हैं – वीएलएसआई प्रणालियों के लिये संगणना सहायित अभिकल्प, संगणक वास्तुशिल्प, (संरचना) डाटाबेस प्रणालियाँ, जैव विविधता तथा आनुवंशीय मितिविज्ञान, उच्च निष्पादन संगणना, बहु-माध्यम प्रणालियाँ तथा जालकार्य सुरक्षा । यह केन्द्र एम. एससी (अभि.) तथा पीएच. डी. कार्यक्रमों के लिये छात्रों को लेता है । यह केन्द्र विज्ञान एवं अभियांत्रिकी स्नातकों के लिये संगणनात्मक विज्ञान में एक अद्वितीय एम. टेक कार्यक्रम भी उपलब्ध कराता है । यह केन्द्र विभिन्न प्रकार के राष्ट्रीय परियोजनाओं में औद्योगिक परामर्श में सक्रिय रूप में कार्यरत रहा है । एसईआरसी में कार्यात्मकता से वितरित संगणना में विभिन्न प्रकार के विशेषीकृत गुच्छ हैं जो भारी संख्या के उपयोगकर्ता समूह के विविध आवश्यकताओं को पूरा करते हैं । निम्नसूची विभिन्न कार्यात्मक गुच्छों का एक नमूना प्रस्तुत करती है :

उच्च संगणक गुच्छ :

केन्द्र के फ्लैगशिप संगणकों का उपयोग बृहत चुनौती की समस्याओं के समाधान में किया जाता है जिनमें सम्मिलित हैं – भागीदारिता तथा वितरित स्मरण प्रणाली – इन दोनों के गठबंधन हैं जैसे :

1.  दो 32 – संसाधक आईबीएम रेगट्टा पी690, प्रत्येक 256 जीबी स्मरण के साथ
2.  एक 16 – संसाधक आईबीएम रेगट्टा पी690, 128 जीबी स्मरण के साथ
3.  दो 32 – संसाधक एसजीआई अल्टीक्स 3700 प्रणाली, 224 जीबी स्मरण के साथ
4.  16 – संसाधक आईबीएम आरएस/6000, एसपी प्रणाली, 32 जीबी मुख्य स्मरण के साथ
5.  अनेक 4 – संसाधक कम्पैक अल्फासर्वर (ईएस40) अंश स्मरण प्रणाली
6.  32 – संसाधक आईबीएम आरएस/6000, एसपी 10 जीबी वितरित स्मरण के साथ

संगणक गुच्छ :एकल – संसाधक आरआईएससी-आघरित प्रणालियाँ जैसे आईबीएम/आरएस6000 59एक्स, एचपी सी2000 तथा कम्पैक एक्सपी 1000 से युक्त हैं । इस समूह के आर-पार चलायमान भार बाँटनेवाला साफ़्टवेयर, विभिन्न प्रणालियों के बीच में उपभोक्ता कार्यों के संतुलित वितरण को सुनिश्चित करता है ।

ग्राफ़िक गुच्छ : ग्राफ़िक सर्वरों जैसे एसजीआई ऑक्टेन, ओनिक्स तथा इंडिगो, एवं एसयूएन अल्ट्रा 60 के साथ हार्डवेयर मुक्त जीएल सहायिता तथा ग्राफिक्स विकास सॉफ़्टवेयर उपकरणों से युक्त हैं ।

अभिगम स्टेशन गुच्छ : यूनिक्स कार्यस्थान जैसे आईबीएम आरएस/6000 340 एवं 43पी, एसयूएन अल्ट्रा 5, तथा अल्ट्रा 10, अल्ट्रा 60, एचपी सी200, कम्पैक एक्सपी-1000, एसजीआई डी तथा ओ2, ओक्टेन, साथ ही इंटेल पेंटियम्स से चालित खिड़की 95/एनटी तथा लिनक्स के साथ समूह से युक्त है ।

सॉफ़्टवेयर  :  एसईआरसी में सभी यूनिक्स प्रणालियों में हैं जो फौर्टरैन, सी, तथा सी के साथ एक रूपी कार्यक्रम विकास प्रदान करते हैं । इसके अतिरिक्त, उच्च संगणना समूह ऑटो-पेरेलिजेशन उपकरणों तथा संदेश वाहक ग्रंथालयों जैसे केएपी, फोर्ज90, एमपीआई तथा पीवीएम को उपलब्ध कराते हैं ग्राफ़िक प्रणालियाँ मुक्त अन्वेषक, तथा निष्पादक के रूप में उपकरण उपलब्थ कराती हैं । इसके अतिरिक्त, विशेष प्रयोजन सॉफ़्टवेयर की अधिकता तथा ग्रंथालय भी उपलब्ध हैं जैसे :

1.  अंकात्मक एवं संकेतात्मक संगणना के लिये मैटलैब, मैथेमेटिक्स एवं मैपल
2.  आईएमएसएल, ईएसएसएल, डीएक्सएमएल, सीओएमपीएलआईबी एवं एमएलआईबी जैसे
    मैथेमेटिकल ग्रंथालय
3.  ईएमएएस, एनएएसटीआरएएन तथा एनआईएसए जैसे संरचनात्मक अभियांत्रिकीय से संबद्ध
    सॉफ़्टवेयर
4.  एमएसआई बयोसिम साइट जैसे जैविकीय प्रतिरूपण सॉफ़्टवेयर

जालकार्य :  एसईआरसी में सभी प्रणालियाँ जालकार्य पर हैं तथा परिसर भर में व्यापक अभिगम वाली हैं । एसईआरसी भवन में एक गिगाबिट ईथरनेट (बैकबोन) आधारस्तंभ है जो प्रत्येक कार्यस्थान तथा सर्वरों को स्विच्चित 100 mbps संपर्क (कनेक्शन) प्रदान करता है । इसके साथ एसईआरसी नेटवर्क का संयोजन परिसर-भर में FDDI बैकबोन के साथ है जिसे संपूर्ण रूप से दोहरे गिगाबिट ईथरनेट बैकबोन के रूप में उन्नत श्रेणीकृत किया जाएगा जो संस्थान के आरपार स्थित विविध विभागों को गिगाबिट गति एवं व्यापकता उपलब्ध करायेगा । अन्य सुवीधाएँ हैं – जो संगणना सेवाओं से भिन्न हैं – एसईआरसी अपने उपभोक्ताओं को परिधीय समूह सेवा उपलब्ध करायेगा, जिसमें सम्मिलित हैं – ब्लैक एवं व्हाइट लेज़र मुद्रण उच्च विभेदक वर्ण लेज़र तथा स्लाइडों तथा पोस्टरों के निर्माण के लिये डेस्कजेट मुद्रण, मुद्रित पाठ्य तथा प्रतिमाओं के लिये उच्च विभेदक संवीक्षण तथा सीडी-रॉम लेखन ।

अनुसंधान : एसईआरसी के संकायों ने तथा विज्ञानियों ने निम्न सुसंपन्न अनुसंधान प्रयोगशालाओं का संगठन किया है :-

• कम्प्यूटर एडेड डिज़ाइन
• कम्प्यूटर अर्किटेक्चर
• डाटाबेस सिस्टम्स
• इलेक्ट्रमैग्नेटिक्स
• ग्रिड अनुप्रयोग अनुसंधान
• उच्च-निष्पादन संगणक
• बहु-माध्यमित प्रणालियाँ
• वैज्ञानिक संगणक

एसईआरसी ने वर्तमान पुस्तकों तथा संगणक प्रणालियाँ या सॉफ़्टवेयर से संबद्ध नियम-पुस्तिकाओं के संग्रहण के साथ संगठित किया है । एसईआरसी अपने उपभोक्ताओं के लिये फ़ोन पर या ई-मेल द्वारा 24 घोटों तक हेल्फ-डेस्क की सेवा प्रदान करता है ।

जैव सूचनिकी केन्द्र (संरचनात्मक जैविकी एवं जैव-संगणना में उत्कृष्टता केन्द्र)

यह जैव सूचनिकी केन्द्र एक अनुसंधान एवं सूचना केन्द्र है, एसईआरसी के एक स्वायत्त एकक के रूप में कार्य करता है । इस केन्द्र का प्रमुख पात्र है – अपनी स्थापना के समय से ही डीबीटी सहायित पहल के रूप में विभिन्न स्तरों पर जैविकीय विज्ञान में विभिन्न प्रकार की सूचना का प्रचार-प्रसार करने का रहा है । विगत कुछ वर्षों से जैवसूचनिकी के कार्यकलापों के केन्द्र बिंदुओं में निदर्शनात्मक परिवर्तन रहे हैं । केन्द्र अब, अपने पास उपलब्ध डाटा, संसाधन से ज्ञान-सृजन के महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने के पूप में विकसित हो रहा है । जिसे ज्ञान की सूचना के डाटा के मूल्य स्रोत को अनुप्रयोगों के प्रति स्थापित किया जा रहा है । केन्द्र के इन कार्यकलापों तथा हाल ही के वर्षों में उच्च प्रकाशन कीर्तिमानों के कारण डीबीटी द्वारा इस केन्द्र को जैव-सूचनिकी में उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में मान्यता प्राप्त हो गयी है ।

राष्ट्रीय विज्ञान सूचना केन्द्र

राष्ट्रीय विज्ञान सूचना केन्द्र की स्थापना 1983 में की गई है । इसके लक्ष्य हैं – भारतीय विज्ञान संस्थान के शैक्षिक समुदाय से संगत विश्वव्यापी विद्वतापूर्ण सूचना स्रोत के प्रति असीम जालकार्य अभिगम प्रदान करना ।

• भारतीय विज्ञान संस्थान के अनुसंधान उत्पादों के लिये व्यापक प्रसार-प्रचार कराने हेतु भारतीय
  विज्ञान संस्थान के अनुसंधान प्रकाशनों के ई-मुद्रण अंकात्मक अनुसंधान अभिलेखागार को
  विकसित करना तथा अनुरक्षण करना ।

• सूचना एवं ज्ञान प्रबंधन में शिक्षण, अनुसंधान तथा प्रशिक्षण का संचालन करना, जिसका केन्द्र
  बिंदु है – अंकात्मक सूचना सुविधाओं तथा सेवाओं की स्थापना, प्रचालन एवं प्रबंधन करने का
  रहा है ।

• विद्युन्मानीय सूचना स्रोतो, उपकरणों तथा सेवाओं के प्रभावात्मक उपयोग में भारतीय विज्ञान
  संस्थान के शैक्षिक समुदाय को अभिमुखीकरण तथा प्रशिक्षण प्रदान करना है ।  

संस्थान के समुदाय को ई-सूचना सेवा उपलब्ध कराने के अलावा, यह केन्द्र, प्रायोजित अनु. एवं विकास परियोजनाओं का उत्तरदायित्व लेता है तथा सूचना एवं ज्ञान-प्रबंधन में डेढ वर्ष के स्वात्कोत्तर प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करता है । पूर्व में विज्ञान सूचना के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अंतर विश्वविद्यालय केन्द्र के रूप में एनसीएसआई ने 1984 से 2002 तक भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुसंधानकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान जागरूकता सेवाएँ प्रदान की है ।

सूचना सेवा

यह एनसीएसआई संस्थान के विद्वानों को विविध प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक सूचना उपलब्ध कराता है । इसमें सम्मिलित हैं – अंतर्जाल तथा अंतर्जाल अभिगम की जागतिकता से अग्रणी ग्रंथ सूचीय डाटाबेस के प्रति रहा है, ई-जर्नलों के लिये प्रवेश (प्रमुख) सेवाएँ, तथा अंतर्जाल पर मुक्त अभिगम स्रोत, ग्राहक स्नेही जाल अभिगम (‘ MySciGate ’) तथा प्रलेख वितरण सेवाएँ । एनसीएसआई एक मासिक विद्युन्मानीय समाचार पत्र इनफ़ो वॉच भी प्रकाशित करता है जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुसंधानकर्ताओं के लिये संगत नये अंतर्जाल स्रोतों के बारे में रिपोर्टित करता है । एनसीएसआई द्वारा उपलब्ध कराई गई सभी सेवाएँ SciGate portal site (विज्ञान द्वार प्रवेश द्वार स्थल) द्वारा समेकित है । SciGate एक विज्ञान सूचना प्रवेश द्वार है तथा प्रवेश द्वार जाल स्थल है जिसे भारतीय विज्ञान संस्थान के छात्रों, कर्मचारी वर्ग तथा संकाय के उपयोग के लिये विकसित किया गया है । यह SciGate स्थानीयता से संग्रहित तथा अंतर्जाल आधारित विज्ञान, अभियांत्रिकी, औषधि तथा प्रबंध सूचना स्रोतों के विविधता के प्रति एकल बिंदु अभिगम उपलब्ध कराता है । डाटा बेसों, तथा अन्य विद्युन्मानीय स्रोतों के अभिगम के भारतीय विज्ञान संस्थान को प्रदत्त अनुज्ञप्ति को केवल भारतीय विज्ञान संस्थान के उपभोक्ताओं तक ही सीमित किया गया है । SciGate (मुक्त स्रोतों, इनफ़ो वॉच, भारतीय विज्ञान संस्थान प्रकाशनों) की विषय वस्तु के अंश तथा E-JIS (निःशुल्क – ई-जर्नल), अंतर्जाल पर निःशुल्क अभिगम्य हैं । भारतीय विज्ञान संस्थान का ई-मुद्रण, अभिलेखागार, संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं को अपने पूर्व मुद्रणों, पश्च मुद्रणों तथा अन्य विद्वतापूर्ण प्रकाशनों को स्वयं अभिलेखागार कर लेने हेतु समर्थ बना देता है। अपने अनुसंधान प्रभाव (छाप) को सुधारने की दृष्टि से इन प्रकाशनों के लिये विश्वव्यापी सरल अभिगम उपलब्ध कराता है ।

एलआईएस – फोरम – एनसीएसआई संतुलित (साधारण), मुक्त चर्चा मंच (सूची सेवा) एलआईएस – फोरम का प्रचालन भारत के ग्रंथालय तथा सूचना व्यावसायियों के लिये करता है । जुलाई, 2004 के अनुसार, इस चर्चा मंच पर लगभग 640 ग्रंथालय तथा सूचना व्यवसायियों ने प्रतिभागिता की है ।

स्रोत (संसाधन)

एनसीएसआई के पास सन्नद्ध सूचना उत्पादों तथा सेवाओं के विकास, संग्रहण तथा प्रबंधन के लिये, तथा अनु. एवं विकास परियोजनाओं तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन के लिये आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं । इसमें सम्मिलित हैं – स्विच्च आधारित एलएएन वेब (जाल) सर्वर्स, प्रयोगशालाएँ, व्याख्यान, सभांगण, चर्चा-कक्ष, अंतर्जाल संयोजकता, ई-प्रकाशन, तथा अंकात्मक ग्रंथालय उपकरण, अंतिम उपयोगकर्ताओं के उपयोग के लिये सूचना कियोस्क, लाइसेन्सित डाटा बेस, तथा एक ग्रंथालय । स्टाफ में सम्मिलित हैं – संगणना एवं सूचना विज्ञान में विशेषज्ञ एलसीएसआई वेबसाइट : SciGate : भा वि सं विज्ञान सूचना प्रवेश द्वार – http://www.ncsi.iisc.ernet.in/E-JIS : ई-जर्नल सूचना सेवा – http://e-jis.ncsi.iisc.ernet.in/IISc ई-मुद्रण अभिलेखागार - http://eprints.iisc.ernet.in/

सीसीई    

शिक्षा निरंतरता केन्द्र (सीसीई) – अल्पावधि / पुनश्चर्या पाठ्यक्रमों द्वारा संस्थान की सुवीधाओं का उपयोग करके, विशिष्ट लक्ष्य समूहों के लिये संगत विविध कार्यक्रमों के उन्नयन के कार्यकलापों का समन्वयन करता है । यह सीसीई संबद्ध विभागों तथा प्रायोजक अभिकरणों के साथ विफिन्न शिक्षा निरंतरता के कार्यक्रमों के साथ समन्वय करता है तथा कार्यक्रमों को संगठित करनेवाले संकाय सदस्यों को आवश्यक सहायता एवं अंतर्संरचना समर्थन उपलब्ध कराता है ।

नानो विज्ञान तथा अभियांत्रिकी केन्द्र (CeNSE)

नानो विज्ञान तथा अभियांत्रिकी केन्द्र नानो-इलेक्ट्रॉनिकी, साधनों, पदार्थों, सूक्ष्म तथा नानो-इलेक्ट्रो-(विद्युन्मानीय) यांत्रिकीय प्रणालियों, जैव – तथा नानो प्रकाश मात्रिकी, अंतरापृष्ठों तथा समेकित अल्प मान प्रणालियों जैसे विषयों को व्याप्त करनेवाले नानो-मान विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विस्तृत क्षेत्रों में अनुसंधान तथा शिक्षा की अंतर्शाखाओं पर अपना ध्यान केन्द्रीकृत करता है । क्रोड संकाय के अनुसंधान कार्यक्रमों के अतिरिक्त, यह केन्द्र, भारतीय विज्ञान संस्थान (भा वि सं) में स्थित अभियांत्रिकी, तथा मूलभूत विज्ञान के विभिन्न विभागों के 40 से अधिक संकाय सदस्यों से युक्त इन अंतर्शाखीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करता है । केन्द्र के पास विभिन्न अन्वयनों के लिये तीक्ष्ण गति के नानो मान प्रौद्योगिकियों के विकास के लिये समर्थ बनाने हेतु सन्नद्ध नानो संविरचना तथा संलक्षणीकरण सुविधाएँ उपलब्ध है ।

अंकात्मक सूचना सेवा केन्द्र (DISC)

अंकात्मक सूचना सेवा केन्द्र (DISC) – की स्थापना संस्थान के समुदाय तथा विस्तृत रूप से राष्ट्र की अंकात्मक सूचना की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु की गई है । विशेषकर, इसका लक्ष्य है – वैज्ञानिक सूचना तथा पुस्तकों का अंकीकरण, (विद्युन्मानिकी) (पाठ्यक्रम) इलेक्ट्रॉनिक कोर्स वेयर अदि के अंकीकरण को संभालना ।DISC में निम्न परियोजनाओं का कार्य किया जाता है : भारतीय परियोजना का अंकीय ग्रंथालय, (जहाँ यह प्रस्तावित है कि यहाँ पर एक ऐसा ग्रंथालय का निर्माण कर दें जो जहाँ मुक्त वाचन, तलाशनीय संग्रह हो जिसमें एक मिलियन पुस्तकें, प्रमुखतः भारतीय भाषाओं में प्रत्येक व्यक्ति को अंतर्जाल पर उपलब्ध हों), भारो – फ्रेंच सैबर विश्वविद्यालय परियोजना (यह भारत तथा फ्रान्स के बीच एक संयुक्त परियोजना है जहाँ सीधे दो पाथेय (मार्गीय) उपग्रह संचार का उपयोग करके भारतीय एवं फ्रेंच प्रशिक्षकों द्वारा संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं) । तथा विज्ञान परियोजना (जहाँ भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सूचना के लिये व्यापक जाल स्थल (वेबसाइट) प्रचालनीय बना दिया गया है ।

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