शैक्षिक

प्रभाग – जैविकीय

संस्थान का जैविकीय विज्ञान प्रभाग, आधुनिक जैविकी के सीमांत क्षेत्र में अग्रपंक्ति के अनुसंधान में कार्यरत है । यह तीन प्रमुख विभागों, चार छोटे केन्द्रों तथा तीन सुविधाओं को व्याप्त करता है तथा अपने नामांकन में पचास से अधिक संकाय सदस्य तथा लगभग 300 अनुसंधान विद्वान तथा डॉक्टरोत्तर अधिसदस्य निहित हैं । इस प्रभाग के विज्ञानी आधुनिक जैविकी के लगभग सभी पहलुओं पर कार्य करते हैं – जैसे आण्विक जैविकी, संरचनात्मक जैविकी, प्रतिरक्षा विज्ञान (प्रतिशोधिकी), किण्वक विज्ञान, पुनरुत्पादन / जनन तथा विकासात्मक जैविकी, परिसरीय तथा पर्यावरणीय अध्ययन तथा अन्य और भी । इन अन्वेषणों में अनुप्रयुक्त पद्धतियों में सम्मिलित हैं – आनुवंशिकी अभियांत्रिकी, प्रतिरोधात्मक तकनीक, PCR वर्णक्रमदर्शी, क्ष-किरण, स्फटिक विज्ञान, विद्युदणु सूक्ष्मदर्शी, जैव-सूचिनिकी, तथा संगणक प्रतिरूपण ।

संस्थान के जैविकीय विज्ञान प्रभाग को (मूलफूत आधुनिक जैविकीय अनुसंधान के लिये) दशकों से अंतर्राष्ट्रीयता से मान्यता प्राप्त केन्द्र के रूप में जाना जाता है । विगत वर्षों में, अनुसंधान के उपयुक्त अनुप्रयोग (अन्वयन) वर्धित आकर्षण प्राप्त कर रहा है । सामान्य वर्तमान कौशल तंत्र तो उत्कृष्ट मूलभूत अनुसंधान का संचालन करना तथा इससे निकलने वाले अनुप्रयोगों (अन्वयनों) का ओजस्विता (समर्थता) से अनुसरण करता रहा है । सद्यतः प्रभाग के विज्ञानी, पर्याप्त अनुप्रयोग संभाव्यता के साथ निम्न तीन विशाल क्षेत्रों में अपने अधिकांश प्रयत्नों को सामूहिक रुप से प्रयोग करने की प्रक्रिया में हैं । वे हैं :

• सांसर्गिक रोग
• औषध एवं अण्विक अभिकल्प
• जीन लक्ष्य, आनुवंशिक अव्यवस्था तथा आनुवंशिक विविधता

इन प्रयत्नों द्वारा प्रभाग के विज्ञानियों की प्रतिबद्धता यह रही है कि वे उत्कृष्ट जैविकीय अनुसंधान के संचालन को जारी रखना तथा क्षयरोग, मलेरिया, अतिसारीय रोगों तथा विभिन्न प्रकार अव्यवस्थाओं जैसी वास्तविक जीन की समस्याओं की समाधान करना ।

इस अनुभाग में